
बेंगलुरु। प्रस्तावित ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप (GBIT), जिसे बिदादी टाउनशिप परियोजना भी कहा जाता है, के लिए कृषि भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों और पुलिस के बीच शुक्रवार को बैरामंगला में तनाव की स्थिति बन गई। बिदादी-हारोहल्ली मुख्य मार्ग पर धरना दे रहे किसानों को हटाने के दौरान पुलिस ने 50 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। इनमें कई महिला किसान भी शामिल थीं।
किसान लंबे समय से प्रस्तावित टाउनशिप परियोजना का विरोध कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का दावा है कि शुक्रवार को उनका आंदोलन 566वें दिन में पहुंच गया था। किसानों ने आंदोलन को तेज करते हुए इसी सप्ताह अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी और बिदादी-हारोहल्ली मुख्य सड़क को ट्रैक्टर और बैलगाड़ियों के जरिए बाधित कर दिया था। उनकी मुख्य मांग परियोजना के लिए कृषि भूमि के प्रस्तावित अधिग्रहण को रद्द करने की है।
शुक्रवार को बैरामंगला सर्किल के आसपास बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्र थे। किसानों ने मुख्य सड़क पर ट्रैक्टर और बैलगाड़ियां खड़ी कर रखी थीं। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ पशुओं को भी सड़क किनारे बांधा गया था, जिससे बिदादी और हारोहल्ली के बीच यातायात प्रभावित हो रहा था। पुलिस ने सड़क से अवरोध हटाने के लिए प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और बाद में उन्हें हिरासत में लेना शुरू किया।
पुलिस कार्रवाई शुरू होते ही प्रदर्शन स्थल पर माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रदर्शनकारियों ने उन्हें हटाए जाने का विरोध किया। कुछ महिला किसानों ने विरोध जताते हुए सड़क पर लेटकर पुलिस कार्रवाई रोकने की कोशिश की। स्थानीय रिपोर्टों में प्रदर्शनकारियों को पुलिस वाहनों और बसों में बैठाकर ले जाए जाने का उल्लेख किया गया है।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें जबरन हटाया और महिला किसानों के साथ उचित व्यवहार नहीं किया। ये आरोपबिदादी टाउनशिप के खिलाफ किसानों का आंदोलन, सड़क जाम हटाने पहुंची पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस का कहना रहा है कि मुख्य सड़क बाधित होने के कारण यातायात बहाल करना जरूरी था। इससे पहले भी पुलिस ने किसानों को सड़क पर पंडाल लगाने से रोकते हुए कहा था कि प्रदर्शन के लिए दूसरी जगह का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन मुख्य सड़क को बाधित नहीं किया जाना चाहिए।
किसानों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने के बाद सड़क पर ही अपना ठिकाना बना लिया था। तेज धूप से बचने के लिए प्रदर्शनकारियों ने साड़ियों और ग्रीनहाउस नेट का इस्तेमाल कर अस्थायी छाया की व्यवस्था की थी। प्रदर्शन स्थल पर गणेश प्रतिमा भी स्थापित की गई थी और आंदोलन के साथ पूजा-अर्चना की जा रही थी।
भूख हड़ताल के दौरान किसानों की तबीयत बिगड़ने की घटनाएं भी सामने आईं। आंदोलन के दूसरे दिन तीन किसानों के बीमार पड़ने के बाद उन्हें एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया था। इसके बावजूद दूसरे प्रदर्शनकारियों ने भूख हड़ताल जारी रखी।
किसानों का कहना है कि परियोजना के लिए प्रस्तावित जमीन उनकी आजीविका से जुड़ी हुई है। आंदोलन में केवल जमीन मालिक किसान ही नहीं बल्कि महिलाएं और कृषि पर निर्भर दूसरे लोग भी हिस्सा ले रहे हैं। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि राज्य सरकार भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को वापस ले और परियोजना को लेकर उनकी मांगों पर फैसला करे।
इस विवाद में किसानों की एक महत्वपूर्ण मांग सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति को लेकर भी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि परियोजना की समीक्षा के लिए बनाई गई समिति को प्रभावित गांवों में जाकर लोगों से सीधे बातचीत करनी चाहिए। उनका आरोप है कि लंबा आंदोलन चलने के बावजूद उनकी समस्याओं को पर्याप्त रूप से नहीं सुना गया है।
किसानों ने मांग की है कि ग्राम पंचायत स्तर पर सुनवाई आयोजित की जाए। उनका कहना है कि इससे किसान, खेतिहर मजदूर, बटाईदार, महिलाएं और वरिष्ठ नागरिक अपनी बात सीधे समिति के सामने रख सकेंगे। प्रदर्शनकारियों ने यह भी सवाल उठाया है कि अपनी आपत्तियां दर्ज कराने के लिए प्रभावित लोगों से आधार कार्ड और जमीन के दस्तावेज के साथ अलग प्रक्रिया पूरी करने को क्यों कहा जा रहा है।
बिदादी टाउनशिप परियोजना को लेकर किसानों और सरकार के बीच विवाद कई महीनों से चल रहा है। इससे पहले अगस्त में किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से मुलाकात की थी। किसानों ने परियोजना रद्द करने की मांग रखी थी। उस समय मुख्यमंत्री ने कहा था कि किसी किसान को जबरन जमीन देने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। हालांकि किसानों ने स्पष्ट किया था कि जब तक परियोजना रद्द करने की आधिकारिक घोषणा नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
किसानों ने सितंबर में आंदोलन को नया रूप देते हुए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। बड़ी संख्या में किसान बिदादी-हारोहल्ली मुख्य सड़क पर बैठ गए और ट्रैक्टर तथा बैलगाड़ियों को सड़क पर खड़ा कर दिया। इससे इस मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ। यह मार्ग आसपास स्थित कई औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
शुक्रवार की कार्रवाई के दौरान पुलिस ने सड़क खाली कराने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों के विरोध के कारण कुछ समय के लिए तनाव बना रहा। बाद में किसानों और महिला प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर सड़क पर लगाए गए अवरोध हटाए गए। स्थानीय रिपोर्टों में प्रदर्शन स्थल पर स्थापित गणेश प्रतिमा हटाए जाने का भी उल्लेख है।
भूमि अधिग्रहण का मुद्दा राजनीतिक विवाद का विषय भी बन चुका है। विभिन्न विपक्षी नेताओं ने किसानों के आंदोलन का समर्थन किया है और पुलिस कार्रवाई की आलोचना की है। दूसरी ओर प्रशासन ने मुख्य सड़क पर यातायात व्यवस्था बनाए रखने को कार्रवाई का कारण बताया है। किसानों और सरकार के बीच परियोजना को लेकर मतभेद अभी बरकरार हैं।
फिलहाल किसानों की प्रमुख मांग यही है कि कृषि भूमि के अधिग्रहण का प्रस्ताव वापस लिया जाए और सरकार प्रभावित गांवों के लोगों के साथ सीधे बातचीत करे। शुक्रवार की पुलिस कार्रवाई के बाद बिदादी टाउनशिप विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। लंबे समय से आंदोलन कर रहे किसानों और सरकार के बीच इस मुद्दे का समाधान कब निकलता है, इस पर अब नजर बनी हुई है।





